Ye na pochiye hm se karbala me kya dekha
*यह न पूछिए हमसे कर्बला में क्या देखा
सिबते मुस्तफा का सर जिस्म से जुदा देखा
*कत्ल हो गए अब्बास कूजे रह गए खाली नन्हे नन्हे बच्चों का टूटा आसरा देखा
*इंकलाबे आलम की यह भी इंतहा देखी उम्मते मोहम्मद को शाह से फिरा देखा
*वाक्याते सरवर को 1400 बरस गुज़रे
फिर भी हर मोहर्रम को शह का गम नया देखा
*वह गिरोहे फासिक था मजमए मुनाफिक था
फरक़े बिनते जेहरा को जिसने बेरिदा देखा
*जुस्तुजू सकीना को सीनेए पदर की थी सीनाएं शहे दी पर शिमर को चढ़ा देखा
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