Kisi mazloom ki yaad aa rahi hai

 *किसी मजलूम की याद आ रही है

 जमाने पर उदासी छा रही है

 

*यह किस कड़ियल जवां को कर्बला में

 कलेजे से कज़ा चिमटा रही है


*जनाजे पर किसी अरमान भरे के

 जवानी अश्के खू बरसा रही है

 

*तसद्दूक होके लाशे नौजवा पर 

फूफी जैनब गले चिमटा रही है 


*अटी थी खाके सहरा में जो जुल्फे 

बलाए लेके मां सुलझा रही है


*दिए देती है जां अपनी सकीना 

जिगर थामें पछाड़े खा रही है


*कहां माँ ने यह मैयत के सिरहाने 

उठो अकबर फूफी घबरा रही है 


*सुनोगे क्या मेरे गम की कहानी 

कयामत की तुम्हें नींद आ रही है


*बचा लो मेरे गैरतदार बेटा 

उठो मां कैदखाने जा रही है

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